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भव्य  मंदिर  का  निर्माण  क्यों ??

धर्मेन्द्र प्रताप

पटना। “आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बिहार की ऐतिहासिक राजधानी पाटलिपुत्र में इस्कॉन का एक भव्य मंदिर अवश्य होना चाहिए। “इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद के शब्द। यह बात कई दशक पूर्व अपने देह छोड़ने के पूर्व उन्होंने कही थी।  और,आज उनके बताए रास्ते पर चलकर उन्हीं के अनुनायियों ने राजधानी पटना में श्री कृष्ण कृपा दास के नेतृत्व में एक भव्य मंदिर के निर्माण कार्य को अंतिम रूप देने जा रहे हैं। कृष्ण कृपा दास पटना इस्कॉन के अध्यक्ष भी हैं।

पटना इस्कॉन के अध्यक्ष श्री दास बताते हैं कि श्री श्री राधा बाँके बिहारीजी मंदिर वैदिक संस्कृति का केंद्र बिंदु आध्यात्मिक विकास तथा उसका ह्रदय प्रामाणिक वैष्णव मंदिर है। श्री श्री राधा बाँके बिहारीजी मंदिर वैदिक पञ्चरात्रिक विधि की सनातन पद्धति के अनुसार श्री भगवान की पूजा करने के लिए समर्पित है। कुशल वास्तुप्रज्ञ श्री विश्वकर्माजी द्वारा 84 खम्भों का महत्व सुस्थापित है। इसलिए यह मंदिर 84 खम्भों से युक्त ,शोभासम्पन्न और स्वर्ण कलश से विभूषित होगा।सनद रहे ,कुछ दिन पूर्व ही इस्कॉन ने अपनी पचासवीं वर्षगांठ मनाई थी जिसके तहत कलकत्ता और बम्बई में कई भव्य आयोजन हुए।  इसमें  163 देशों के राधा -कृष्ण प्रेमी शिरकत किए थे।  श्री दास बताते हैं कि प्रभुपाद जी के समय में पूरी दुनिया में इस्कॉन के मात्र 108 केंद्र थे जिसे उन्होंने अपने हाथ से बनाया लेकिन इस समय पुरी दुनिया में 700 केंद्र चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रभुपाद स्वामी के बताए रास्ते पर चलकर इस्कॉन के प्रत्येक केंद्र अपने कार्यों में गति लाया है चाहे वो हरिनाम कीर्तन हो या फिर ,मंदिर निर्माण ,कथा प्रचार या फिर फुड फॉर लाइफ। इसके अलावा,हम गांवों में नामहट के नाम से कृष्ण भक्ति का प्रचार भी करते हैं। फ़िलहाल यह अपने प्रदेश में 10 गांवों में यह काम चल रहा है जिसे बढाकर 20 करने की योजना है।

उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि  शीघ्र ही इसके निर्माण का काम पुरा हो जायेगा।देश में करोना का प्रभाव नहीं पड़ा होता तो यह अबतक बनके तैयार भी हो गया रहता पर राधा बांके बिहारी जी की शायद अभी ईच्छा नहीं हुई है।  इस मंदिर के निर्माण पर 51 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। और यह पुरे उत्तर भारत की इकलौती मंदिर है जो इतनी ऊंची लागत से निर्मित हो रही है। यह मंदिर इस्कॉन के टॉप टेन मंदिरों में से एक होगी। इसे बनाने के लिए राजस्थान और गुजरात से कारीगर आए हैं। उन्होंने बताया कि प्रभुपाद स्वामी ने सात उद्देश्यों को लेकर इस्कॉन यानि अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ की स्थापना की थी।

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