35 साल पहले विधानसभा सदस्य बने थे नीतीश, फिर कभी नहीं लड़ा चुनाव - BiharDailyNow
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35 साल पहले विधानसभा सदस्य बने थे नीतीश, फिर कभी नहीं लड़ा चुनाव

पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। जहां सभी नए-पुराने उम्मीदवार जीत के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं, वहीं बिहार के विकास पुरुष नीतीश कुमार एक बार फिर से विधानसभा चुनाव में अपनी उम्मीदवारी से दूर हैं। बिहार की सत्ता पर भले ही नीतीश 15 साल से कायम हों, लेकिन उन्होंने 35 साल से बिहार विधानसभा के लिए कोई चुनाव नहीं लड़ा है। अब यह अबूझ पहेली है कि नीतीश क्यों जनता के बीच जाना नहीं चाहते हैं।

राजनीति की शुरुआत विधानसभा से
जेपी आंदोलन से जुड़े रहे नीतीश ने 1985 में पहली बार विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। यही वह समय है जब वह अंतिम बार बतौर विधानसभा सदस्य सदन में मौजूद थे। इसके बाद जैसे जैसे नीतीश का कद बढ़ता गया, उन्होंने बिहार से नई दिल्ली की राजनीति का सफर करना शुरु कर दिया। इसके बाद वह लोकसभा के सदस्य बने, लेकिन विधानसभा से उन्होंने अपनी दूरी बनाए रखी।

मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नहीं लड़ा चुनाव
बिहार में नीतीश कुमार छह बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, लेकिन कभी भी बतौर विधानसभा सदस्य नहीं बने और सुरक्षित माने जानेवाले विधान परिषद से ही सत्ता संभालते रहे। वह भी तब जब यह तय था कि विधानसभा चुनाव उनके नाम पर लड़ी जा रही है और उन्हें कोई चुनौती नहीं दे सकता है।

अंतिम चुनाव में मिली थी हार
नीतीश कुमार अंतिम बार किसी आम चुनाव में 2004 में बतौर कैंडिडेट हिस्सा लिया था। 2004 में एडीए की अटल सरकार की सत्ता में वापसी के दौरान लोकसभा चुनाव में अपने परंपरागत सीट बाढ़ और नालंदा से भाग्य आजमाया था। इन चुनाव में जहां नालंदा में वह जैसे तैसे जीत गए, लेकिन बाढ़ सीट से बुरी हार का सामना करना पड़ा। कहा जाता है कि इस हार से नीतीश को गहरा सदमा लगा. बाढ़ लोकसभा के बख्तियारपुर से उनका गहरा नाता रहा है. वो वहीं पढ़े-बढ़े लेकिन इस हार के बाद फिर वे चुनाव नहीं लड़े। 2005 में बिहार का मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने सांसदी से इस्तीफा दे दिया और विधान परिषद का सदस्य बने. 2006 में नीतीश बिहार विधान परिषद के सदस्य बने और तब से अबतक विधान परिषद के ही सदस्य हैं।

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