झारखंड के कई जिलों में चक्का जाम और प्रदर्शन, जाने क्यों आदिवासी कर रहे हैं सरना कोड की मांग - BiharDailyNow
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झारखंड के कई जिलों में चक्का जाम और प्रदर्शन, जाने क्यों आदिवासी कर रहे हैं सरना कोड की मांग

रांची। झारखंड की राजधानी रांची सहित सभी जिलों में गुरुवार को चक्का जाम और विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। हजारों की संख्या में आदिवासी सड़कों पर उतर आए हैं। इनकी मांग है कि राज्य में सरना कोड लागू किया जाए। अब आदिवासी बहुल राज्य के मुखिया पर भी इस बात का दबाव बढ़ गया है कि वह उनकी मांगों पर विचार करें।

जनगणना में धर्म के लिए अलग कोड
राज्य में जिस सरना कोड को लेकर प्रदर्शन किए जा रहे हैं, उसके बारे में यह जानना जरुरी है कि वह है क्या। देश में धर्म के कॉलम के लिए छह कोड दिए गए हैं जो कि हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन धर्म के लिए है। अब इन कोड के साथ एक अतिरिक्त कोड की मांग की जा रही है, जो कि आदिवासियों को अलग धर्म के रुप में पहचान दिलाएगा। आदिवासी इसे ही सरना कोड कह रहे हैं, जिसे लागू करने की मांग की जा रही है।

क्या है आदिवासियों के लिए सरना का तात्पर्य

झारखंड के कई शहरों और कस्बों के चौक-चौराहों पर उजला और लाल रंग वाला झंडा लगे हुए मिल जाएंगे। यह झंडा 27 फीसद आबादी वाले आदिवासी अथवा जनजातीय समुदाय का पवित्र प्रतीक चिन्ह है। इसे सरना झंडा कहा जाता है। सरना आदिवासियों के पूजा स्थल को भी कहा जाता है। अबतक आदिवासियों के बारे में यह मान्यता रही है कि आदिवासी कोई धर्म नहीं बल्कि जीवन पद्धति है। इनके पूजा-पाठ के विधि-विधान औऱ रहन-सहन आदि की परंपराएं भी सनातन हिंदू धर्म के अनुरूप हैं। लेकिन झारखंड के स्थापना के बाद से ही यहां की राजनीतिक पार्टियों ने आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड का समर्थन करना शुरू कर दिया। कुछ ने अपने घोषणा पत्र में ही सरना कोड लागू करने की बात कही। अब इसे लागू करने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है।

देश में आंदोलन की तैयारी

राज्य में  सरना कोड लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन  कर रहे केंद्रीय सरना समिति ने  कहा है कि हम संवैधानिक नियमों के तहत मांग कर रहे हैं। इसके लिए देश के दूसरे राज्यों में भी आदिवासियों के साथ मिलकर आंदोलन चलाया जाएगा।

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