क्लास प्रोजेक्ट के सफल होने में ऑनलाइन व डिजिटल शिक्षा का उपयोग व एकीकरण अहम: डॉ कुमार - BiharDailyNow
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क्लास प्रोजेक्ट के सफल होने में ऑनलाइन व डिजिटल शिक्षा का उपयोग व एकीकरण अहम: डॉ कुमार

गया: दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के अध्यापक-शिक्षा विभाग द्वारा ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की विशेषताओं एवं संभावनाओं पर आयोजित 15 दिवसीय ‘ऑनलाइन व्याख्यानमाला’ के नौवे दिन एक विशेष व्याख्यान डॉ. रवीन्द्र कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया। व्याख्यान में उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तत्वावधान में ‘ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा का उपयोग तथा एकीकरण’ पर न केवल वृहद चर्चा हुई बल्कि ऑनलाइन और डिजिटल योजनाओं, नीतियों एवं पहलों के विकासक्रम पर अपने विचार साझा किए गये।

आयोजन में डॉ. कुमार ने शैक्षिक प्रौद्योगिकी योजना के मुख्य बिन्दुओं को बताते हुए क्लास प्रोजेक्ट के सफल होने में इस योजना के महत्व को भी बताया। डॉ. कुमार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-1986 अथवा नई शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा में प्रौद्योगिकी के एकीकरण संबन्धी संस्तुतियों पर न केवल प्रकाश डाला बल्कि वर्तमान समय में उसके प्रभाव से भी अवगत कराया। प्रौद्योगिकी के एकीकरण के इसी क्रम में आई.सी.टी.@स्कूल, नेशनल मिशन ऑन एजुकेशन थ्रू आईसीटी योजनाओं के महत्व से भी प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। डॉ. कुमार ने स्पष्ट किया कि यदि देखा जाए तो युनेस्को (2002) के पश्चात राष्ट्रीय ज्ञान आयोग (2006-09) पहला ऐसा भारतीय आयोग है जिसने शिक्षा के क्षेत्र में मुक्त शैक्षिक संसाधनों के सृजन तथा उनके प्रसार पर बल दिया तथा अध्यापकों हेतु ज्ञान के प्रचार एवं प्रसार हेतु एक विशेष पोर्टल की संस्तुति भी की।

डॉ. कुमार द्वारा 2010 से आरम्भ शिक्षकों हेतु राष्ट्रीय सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी अवॉर्ड को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों के लिए एक सशक्त माध्यम बताया तथा इसी क्रम में उन्होंने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय-शिक्षा नीति-2012 की मुख्य संस्तुतियों पर प्रकाश डाला एवं डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया से प्रतिभागियों को अवगत भी कराया गया। डॉ. कुमार ने राष्ट्रीय मुक्त शैक्षिक संसाधन कोष, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी पाठ्यचर्या, डिजिटल इंडिया अभियान, ई-पाठशाला, ई-पीजी-पाठशाला, स्वयं-मूक, स्वयं प्रभा डीटीएच चैनल के मुख्य उद्देश्यों तथा उनकी प्राप्ति हेतु किए कए प्रयासों के सम्बन्ध में न केवल अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया बल्कि इनके विकास की प्रक्रिया से भी प्रतिभागियों को परिचित कराया और बताया कि किस प्रकार ये सभी नवोन्मेषी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी संसाधन के पोर्टल्स राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की कल्पना को पूर्ण कर पाएंगें।

व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए डॉ. कुमार ने दीक्षा पोर्टल के विद्यालयी शिक्षा में महत्व को बताते हुए इस पर उपलब्ध विभिन्न प्रकार के ई-संसाधनों से प्रतिभागियों को अवगत कराया। उन्हेंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर आधारित शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित एक वेबीनार का संदर्भ देते हुए अनिता करवाल, सचिव, शिक्षा मंत्रालय द्वारा सुझाए गए बिन्दुओं पर प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया। जैसे-दीक्षा पोर्टल पर लगभग 3100 पाठ्यपुस्तकें 15 विभिन्न भाषाओं में न केवल उपलब्ध है बल्कि इन पुस्तकों के प्रत्येक अध्याय तथा प्रकरण को क्यूआर कोड के माध्यम से अन्य संबन्धित संसाधनों जैसे-ऑडियो, वीडियो, इमेज समूह तथा प्रस्तुतीकरणों से जोड़ा गया है। इस प्रकार यह पोर्टल प्रौद्योगिकी शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की संभावनाओं की प्रतिपूर्ति हेतु सहायक सिद्ध हो सकेगा।

डॉ. कुमार ने अपने व्याख्यान में स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का एकीकरण मुख्य रूप से दो रूपों में प्रथम-शिक्षण अधिगम प्रक्रिया तथा द्वितीय-शैक्षिक प्रशासन प्रक्रिया को सुदृढ बनाना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस शिक्षा नीति में ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा का एकीकरण कुछ महत्वपूर्ण स्थानों पर न होकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रथम अध्याय से लेकर अन्तिम सत्ताईसवे अध्याय तक बखूबी देखा जा सकता है; जैसे-प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा स्तर पर आंगनबाड़ी या बालबाड़ी कर्मियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देना, सूचना संचार प्राद्यौगिकी के प्रयोग से क्षेत्रीय भाषाओं की बाधाओं को न केवल दूर करना बल्कि इन भाषाओं में सामग्री तथा सॉफ्टवेयर भी विकसित करना, शिक्षा को रोचक बनाने के लिए नियमित रूप से प्रयोग हेतु विभिन्न प्रकार के शैक्षिक पजल तथा गेम तैयार करना, बस्ता रहित दिवसों के अवसर पर में प्रौद्योगिकी के प्रयोग पर बल देना तथा शिक्षण, अधिगम, मूल्यांकन सम्बन्धी अनेक प्रकार की शैक्षिक सॉफ्टवेयरों को निर्मित करना आदि।

डॉ. कुमार द्वारा शिक्षक तथा विद्यार्थियों के विचारों को साझा करने हेतु ‘राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम’ के निर्माण की संस्तुति को शिक्षा तथा शोध के लिए एक सराहनीय कदम बताया गया जो शिक्षा के क्षेत्र में न केवल नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी के प्रयोग पर बल देगा बल्कि नई-नई प्रौद्योगिकयों; जैसे-आर्टीफिशयल इंटेलीजेंस, 3डी./7डी., वर्चुयल रियलिटी, ऑगमेंटिड रियलिटी के क्षेत्र में शोध के अवसर भी प्रदान करेगा।

व्याख्यान की समाप्ति की ओर संकेत देते हुए डॉ. रवीन्द्र कुमार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संबन्ध में कुछ चुनौतियों के विषय में भी अपनी चिंता व्यक्त की हालांकि उन्होंने यह भी विश्वास दिलाने का प्रयास किया कि इन चुनौतियों का निवारण नीति के ‘कार्य की योजना’ दस्तावेज में किया जा सकता है; जैसे-ऐसा प्रतीत होता है कि मौजुदा शैक्षिक संस्थाओं पर ही इस शिक्षा नीति के संचालन का भार डाला गया है न कि नई शैक्षिक संस्थाओं को खोलने की बात की गई। ई-संसाधनों के सृजन पर तो बल दिया गया है, परन्तु ये ई-संसाधन क्रियेटिव कॉमन लाइसेंस के अन्तर्गत होंगे अथवा नहीं इसका विवरण भी नीति में कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। दीक्षा तथा स्वयं पोर्टल में किसी प्राइवेट संस्थान की मुख्य भुमिका भी भविष्य में चुनौतिपूर्ण हो सकती है।

विभाग के सहायक प्रोफेसर किशोर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष कुमार गौतम ने किया तथा वर्चुअल माध्यमों से शिक्षा विद्यापीठ के डॉ. रवि कांत, डॉ तरूण कुमार त्यागी, डॉ. चन्द्रप्रभा पाण्डे, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. समरेश आदि शिक्षक इस सत्र में जुड़े रहे।

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