सितारों की दुनिया से, बिहार की सियासत तक 'नेपोटिज्म' - BiharDailyNow
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सितारों की दुनिया से, बिहार की सियासत तक ‘नेपोटिज्म’

दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के मौत के बाद ‘परिवारवाद’ एक ऐसे मुद्दे के रूप में उभरा, जिसने बॉलीवुड की जड़े हिला कर रख दी। लेकिन परिवारवाद सितारों की दुनिया से लेकर सियासत तक अपनी शाख फैला चुका है। या यूं कहें हर वो जगह जहां ‘नेम और फेम’ है वहां परिवारवाद व्यापक रूप से फैल चुका है। देश का शायद ही कोई ऐसा कोना होगा ज​हां आपको राजनीति में लंबी चली आ रही पीढीयां ना मिले। वहीं इसी कड़ी में बिहार चुनाव के नए चेहरे के रूप में राजनेता शरद यादव की बेटी और अभिनेता और राजनीतिज्ञ शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे भी शामिल हो गए हैं। बिहार में विधानसभा चुनाव पिक पर है, ऐसे में आज हम आपको बिहार के वैसे राजनीतिक परिवारों से परिचय कराएंगे जिनके बिना बिहार की सियासत अधूरी है।

यादव फैमिली

बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्‍नी राबड़ी देवी की भूमिका अहम रही है, बिहार की राजनीति में। लालू प्रसाद का परिवार और उनकी पार्टी राष्‍ट्रीय जनता दल पिछले कई दशकों से बिहार के राजनीति में स​क्रिय है। अब लालू और राबड़ी के छोटे बेटे तेजस्‍वी यादव इस परिवार को फ्रंट फेस बनकर विधानसभा चुनाव 2020 में जुटे हुए हैं। जबकि इसी परिवार के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव, बेटी मीसा भारती, राजनीतिक रूप से अहम अंग हैं आरजेडी पार्टी की। वहीं इस परिवार का यादवों पर एक अनोखा पकड़ ​है।

पासवान फैमिली

लोजपा पार्टी का गठन सन् 2000 में किया गया, पार्टी का इतिहास 20 साल पुराना है। पासवान पहले जनता पार्टी से होते हुए जनता दल और उसके बाद जदयू का हिस्सा रहे, लेकिन जब बिहार की सियासत के हालात बदले तो उन्होंने अपनी पार्टी बना ली। बिहार में इस पार्टी की पकड़ निचली जातियों और दलित समुदाय में मानी जाती है। बहुत कम लोगों को साथ लेकर पासवान ने यह पार्टी बनाई थी और इसका मकसद राज्य के निचले तबके को जोड़ना था। लेकिन उनके निधन के बाद पार्टी की बागड़ोर चिराग पासवान संभाल रहे हैं। इस परिवार में राम विलास के भाई राम चंद्र पासवान और पशुपति कुमार पारस भी पार्टी की राजनीति में सक्रिय भूमिकाओं में हैं।

सिन्‍हा फैमिली

इस परिवार की राजनीति में एंट्री डॉ. अनुग्रह नारायण सिन्‍हा के साथ हुई जो 1946 से 1957 तक बिहार के उप मुख्‍यमंत्री रहे। बाद में उनके बेटे सत्‍येंद्र नारायण सिन्‍हा बिहार के मुख्‍यमंत्री बने। सत्‍येंद्र नारायण की पत्‍नी किशोरी सिन्‍हा सांसद भी रहीं। जबकि उनके न‍िखिल को केरल का गवर्नर बनने का गौरव हासिल हुआ है। न‍िखिल की पत्‍नी श्‍यामा सांसद रही और भतीजे डॉ. विजय कुमार बिहार सरकार में बिहार सरकार में मंत्री रहे। इस परिवार के रामेश्‍वर प्रसाद सिन्‍हा, एनके सिंह, उदय सिंह, माधुरी सिंह भी राजनीतिक रूप से अभी भी सक्रिय हैं।

जगजीवन राम फैमिली

भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम भी बिहार से ताल्‍लुक रखते थे। उनके बाद उनकी राजनीतिक विरासत बेटी मीरा कुमार संभाल रही हैं। वरिष्‍ठ कांग्रेस नेत्री मीरा कुमार को लोकसभा में पहली महिला स्‍पीकर बनने का अवसर भी प्राप्‍त हुआ।

रंजन फैमिली

पप्पू यादव उर्फ राजेश रंजन 1 बार विधायक और 5 बार सांसद रहे हैं। वो पहले राजद में थे, लेकिन 2015 में उन्होंने जन अधिकार नाम से अपनी पार्टी बना ली। रंजीत रंजन भी सांसद रही हैं। उन्होंने पहली बार 1995 में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। उसके बाद उन्होंने 2004 का लोकसभा चुनाव सहरसा से लड़ा और जीत गईं। 2009 में कांग्रेस के टिकट पर सुपौल से लड़ीं, लेकिन हार गईं। 2014 में रंजीत फिर कांग्रेस से सुपौल से ही लड़ीं और जीत गईं। 2019 में भी रंजीत कांग्रेस के टिकट पर सुपौल से लड़ी थीं, लेकिन जदयू के दिलेश्वर कामत से हार गई थीं। इस परिवार में फ‍िलहाल दो चर्चित नाम हैं, पप्‍पू यादव और रंजीत रंजन।

आजाद फैमिली

इस परिवार में भागवत झा आजाद बिहार के मुख्‍यमंत्री रह चुके हैं। जबकि उनके बेटे कीर्ति आजाद दरभंगा सीट से सांसद हैं और राजनीतिक रूप से सक्रिय भी हैं।

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