भारत की इकोनॉमी में 9.5 फीसद की गिरावट रहने का अनुमान - BiharDailyNow
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भारत की इकोनॉमी में 9.5 फीसद की गिरावट रहने का अनुमान

वित्त वर्ष के छह महीने गुजर जाने के बाद मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए आरबीआइ गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास ने वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान देश की इकोनॉमी में 9.5 फीसद की गिरावट रहने का अनुमान लगाया है। साथ ही यह भी कहा है कि इसमें और गिरावट का अंदेशा है।

ये है अनुमान

पहली तिमाही यानी अप्रैल-जुलाई, 2020 के दौरान विकास दर में 23.9 फीसद की भारी गिरावट के बाद चौथी तिमाही यानी जनवरी-मार्च, 2021 के दौरान ही आर्थिक विकास दर के सकारात्मक यानी शून्य से ऊपर जाने की उम्मीद है। इकोनॉमी में वर्ष 2021-22 की दूसरी-तिमाही से ज्यादा मजबूती आने की संभावना भी उन्होंने जताई है।

ये येलान भी किए गए

मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान डॉ. दास ने ब्याज दरों को लेकर कोई बदलाव नहीं करने का ऐलान किया है। यह बाजार व विशेषज्ञों के उम्मीद के मुताबिक है। यानी होम लोन, ऑटो लोन जैसे सावधि कर्ज की दरों को प्रभावित करने वाली रेपो रेट 4 फीसद पर बरकरार रहेगी। इसी तरह से रिवर्स रेपो रेट को 3.5 फीसद पर स्थिर रखा गया है। आरबीआइ का कहना है कि अभी बैंकों के पास फंड की कोई कमी नहीं है और दूसरी तरफ महंगाई की स्थिति भी बहुत संतोषजनक नहीं है। इसलिए ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर ही बना कर रखा गया है।

इससे पहले विश्व बैंक ने लगाया था अनुमान

इससे एक दिन पहले ही विश्व बैंक ने कहा है कि वर्ष 2020-21 में भारत की विकास दर 9.7 फीसदी रहेगी। विश्व बैंक ने वर्ष 2021-22 के लिए 5.4 फीसद और वर्ष 2022-23 के लिए 5.2 फीसद की विकास दर का अनुमान लगाया है।अगले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही से इकोनॉमी ज्यादा तेज हो सकती है।

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