एक सप्ताह में नीतीश के दो मंत्रियों की कोरोना से हुई मौत, इन हालात में चुनाव कितना सही! - BiharDailyNow
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एक सप्ताह में नीतीश के दो मंत्रियों की कोरोना से हुई मौत, इन हालात में चुनाव कितना सही!

विनोद सिंह के बाद पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत ने भी दुनिया छोड़ी

पटना। बिहार चुनाव में भले ही नीतीश कुमार जीत को लेकर आश्ववस्त हों, लेकिन पिछले एक सप्ताह का समय उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बेहद दुखदायी है। कारण है, उनके मंत्रिमंडल के दो मंत्रियों का असमय दुनिया से जाना। चार दिन पहले अति पिछड़ा कल्याण मंत्री विनोद सिंह के निधन से लोग उबरे भी नहीं थे कि शुक्रवार को एक और दुख भरी खबर सामने आ गई। बिहार के पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत ने दुनिया को अलविदा कह दिया। अब सवाल यह है कि एक तरफ नीतीश के मंत्री ही महामारी से सुरक्षित नहीं है, तो इस हालात में बिहार की जनता को चुनाव में झौंक देना किस हद तक सही है।

बिहार की जनता ने दुनिया को बताया हो कि वह कोरोना से जीतने में सबसे ऊपर है, लेकिन यह खुशी नीतीश के दोंनों मंत्रियों के परिवार को नसीब नहीं हुई। बताया गया कि दोनों कोरोना से ग्रसित थे। जहां विनोद सिंह कोरोना को हराने में कामयाब होने के बाद भी पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाए। वहीं कपिलदेव कामत का महामारी के बाद इलाज किया जा रहा था। लेकिन, मौत ने उन पर जीत हासिल कर ली। नीतीश कुमार ने कपिलदेव को श्रद्धाजंलि अर्पित की है और उनके शव को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की घोषणा की गई है।

कोरोना ने इनकी भी ली जान
बिहार में कोरोना के कारण अपनी जान गंवानेवाले विनोद सिंह और कपिलदेव कामत अकेले नहीं हैं। बिहार के बड़े नेताओं में शामिल रघुवंश प्रसाद सिंह की मौत की वजह कहीं न कहीं कोरोना ही थी। भले ही उन्होंने बीमारी पर जीत हासिल कर ली हो, लेकिन इसके बाद भी उनकी हालत कभी पूरी तरह से ठीक नहीं रही। वहीं भाजपा के एमएलसी सुनील कुमार सिंह भी अपनी जान गंवा चुके है। यह वह लोग हैं, जिनसे मिलने के लिए भी किसी को पूरी तरह से सेनेटाइज होना पड़ता है।

चुनाव कराना कितना सही
बिहार में कोविड -19 की रिकवरी रेट दुनिया में सबसे बेहतर बताई जा रही है। दो लाख से मरीजों में 1.87 लाख लोग ठीक हो चुके हैं। लेकिन इस कारण यह कहना कि बिहार में कोरोना का असर पूरी तरह के खत्म हो गया है, जल्दबाजी होगी। आनेवाले दिनों में चुनाव होने हैं। राजनीतिक पार्टियां प्रचार में लगी हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग या नीतीश कुमार इस बात की गारंटी लेंगे कि चुनाव में कोरोना के मामले में बढ़ोतरी नहीं होगी। जिस तरह के महामारी के कारण सुरक्षित माहौल में रहनेवाले माननीय अपनी जान गंवा रहे हैं, वह कई सवाल खड़े कर रहा है, जिसका जवाब चुनाव आयोग और नीतीश को देना होगा कि क्यों ऐसी हालात में राज्य की जनता को चुनाव के बीच में खड़ा किया।

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