पितृपक्ष 2020 : गया में इस बार नहीं आयोजित होगी पितृपक्ष मेला - BiharDailyNow
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पितृपक्ष 2020 : गया में इस बार नहीं आयोजित होगी पितृपक्ष मेला

पितृ पक्ष की शुरूआत 1 सितंबर से हो गयी। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी की तिथि से पितृ पक्ष आरंभ होता है। इस बार 1 सितम्बर को पितृपक्ष शुरूचतुर्दशी की तिथि प्रात: 9 बजकर 38 मिनट पर समाप्त हो रही है। इसके बाद पूर्णिमा की तिथि शुरु हो जाएगी। इस दिन को पूर्णिमा श्राद्ध भी कहा जाता है।

पितृपक्ष में गयाजी में 17 दिवसीय पिंडदान का कर्मकांड पूर्णिमा तिथि से शुरू हो गयी। इस दिन श्राद्ध करता में फल्गुनी नदी तीर्थ में स्नान, तर्पण और नदी तट पर खीर के पिंड से फल्गु श्राद्ध करते है।

इस बार कोरोना की वजह से गया में पितृपक्ष मेला का आयोजन नहीं हो रहा है। लेकिन लोग अपने घर से ही अपने पितरो का तर्पण करेंगे।

आईये जानते है श्राद्ध का महत्व

श्राद्ध करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है, इसके साथ ही दान देने की भी परंपरा है। यदि आपकी कुंडली में पितृदोश है तो यह दोष समाप्त होता है। जिससे रोग,धन संकट,कार्य में समस्याएं दूर होती हैं। श्राद्ध करने से परिवार में आपसी कलह और मनमुटाव का नाश होता है। घर के बड़े सदस्यों का सम्मान बढ़ता है।
श्राद्ध करने दौरान किसी को अपशब्द नही कहने चाहिए।

श्राद्ध कैसे करें

श्राद्ध उनकी मृत्यु तिथि पर ही किया जाता है, मान्यता है कि पिता का श्राद्ध अष्टमी और माता का श्राद्ध नवमी तिथि को करना अच्छा माना जाता है। अगर किसी की अकाल मृत्यु हो जाती है तो ऐसे में श्राद्ध चतुर्दशी के दिन श्राद्ध किया जाना चाहिए। वहीं साधु और संन्यासियों का श्राद्ध द्वादशी के दिन किया जाता है।

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