पुष्पम प्रिया चौधरी: बदलाव की प्रतीक - BiharDailyNow
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पुष्पम प्रिया चौधरी: बदलाव की प्रतीक

राजनीति एक ऐसा शब्द है जिसमें पल-पल बदलाव देखने को मिलती है। वैसे तो जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही पार्टीयों का दल-बदल लगा हुआ है। लेकिन इन सब के बीच एक अहम बदलाव इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में देखने को मिला है। जी हां बिहार में इस बार एक नए चेहरे और एक नए पार्टी ने दस्तक दी है। प्लूरलस के बैनर तले इस साल मार्च के महीने में एक साथ सभी अखबारों में विज्ञापन जारी कर खुद को बिहार के मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार घोषित करने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी अचानक से चर्चा में आ गई। 8 मार्च को अखबारों में इंट्री कर छा जाने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी पहले तो देखने में मॉडल नजर आ रही थी। मूल रूप से दरभंगा जिले की प्लूरल्स पार्टी की अध्यक्ष पुष्पम प्रिया, जेडयू के नेता और विधान परिषद के सदस्य रह चुके विनोद चौधरी की बेटी हैं ये तो हम सब जान चुके हैं। वैसे तो बिहार विधानसभा चुनाव के रेस में दौड़ने वाली सभी पार्टीयों ने बड़े—बड़े दांवे किए है, इन सब के बीच पुष्पम ने 2030 तक बिहार को यूरोप में बदलने का वादा किया है। पुष्पम ने अब तक खुद को पारम्परिक पार्टियों से हट कर पेश किया है। तो, आज हम इस आर्टिकल में बात करेंगे की पुष्पम प्रिया चौधरी कैसे अलग है बां​कि अन्य राजनीतिक पार्टियों से और ये प्रयोग कितना सफल रहेगा बिहार में।

आज तक की सबसे शिक्षित उम्मीदवार

सोशल मीडिया अकाउंट से मिली जानकारी के अनुसार पुष्पम प्रिया चौधरी लंदन में रहती थी। पुष्पम ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंसेज से मास्टर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की है।

ड्रेसिंग सेंस से हैं चर्चे में

जैसे ही हमारे जहन में पॉलिटिक्स का नाम आता है तो सबसे पहले हम औरा आप एक खादि धारी की कल्पना ​करते हैं। जबकि पुष्पम प्रियाा चौधरी इन सब से हट कर काले शर्ट और काले जींस में अपने पूरे चुनावी अभियान में नजर आई हैं, जिसको लेकर वो चर्चे में रही हैं। लेकिन ये सुर्खियां सियासत के अखाड़े में उन्हें मजबूत योद्धा बना पाएंगी या नहीं ये अभी कहना अभी जरा जल्दबाजी होगा।

उम्मीदवारों के लिस्ट में भी बदलाव के झलक

पुष्पम ने उम्मीदवारों की जो लिस्ट जारी की है उसकी चर्चा हो रही है। धर्म के नाम पर बिहारी और जाति के नाम पर पेशे को जगह दी गई है। कहने के लिए कोशिश तो बेहतर है। लेकिन बिहार जैसे राज्य जहां कि आज भी जाति के गणित को देखकर जीत हार का समीकरण बनता बिगड़ता है वहां ये प्रयोग कारगर होगा मुश्किल लगता है।

डिजीटली एक्टिव हैं पुष्पम

चुनावी पिच पर लड़ने के लिए पुष्पम ने टेक्नोलॉजी को अपना हथियार बनाया है। जिससे युवाओं का काफी जुड़ाव है। आमतौर पर बिहार की राजनीति में डिजीटल वॉर अब तक उतना ट्रेंड में नहीं रहा है। लेकिन इन सब के बीच पुष्पम प्रिया चौधरी ​खुद को ​डिजीटली सशक्त साबित कर रही हैं। पुष्पम अपनी बड़ी-बड़ी बातों और राजनीति के तरीकों को लेकर सुर्खियां बटोर रही हैं।

पुष्पम की बातें सुनेंगे तो जानेंगे कि वो बातें तो बड़ी-बड़ी करती हैं लेकिन क्या वाकई में जो बातें वो कह रही हैं उसका बिहार की असली जमीन पर कोई असर दिखने वाला है। इसे बिहार का दुर्भाग्य कहे या कुछ और आज तक बिहार को जो भी बदलने आया है वो खुद बदल जाता है। भविष्य क्या होगा कहा नहीं जा सकता, लेकिन बिहार वो प्रदेश है जहां कुछ भी हो सकता है।

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