वरिष्ठ नेताओं पर कार्रवाई कर क्या संदेश देना चाहती है बीजेपी-कांग्रेस! जानिए यहां - BiharDailyNow
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वरिष्ठ नेताओं पर कार्रवाई कर क्या संदेश देना चाहती है बीजेपी-कांग्रेस! जानिए यहां

भाजपा और कांग्रेस के लिए दशकों से जुड़े रहनेवाले नेता इस चुनाव से गायब
पटना। टिकट नहीं मिलने पर पार्टी से बगावत कर दूसरे दल में शामिल होनेवाले नौ नेताओं के भाजपा ने पार्टी से निकाल दिया। उसी तरह बिहार कांग्रेस के लिए भीष्म पितामह माने जानेवाले सदानंद सिंह सहित तीन बड़े नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। निकाले गए सभी राजनेता सालों से एक ही दल के लिए समर्पित रहे हैं। कहा जा सकता है कि यह अपनी पार्टी के लिए वरिष्ठ सदस्य माने जाते हैं, लेकिन जिस तरह से चुनाव में इन्हें दरकिनार किया गया, कहीं न कहीं यह बताता है कि अब इनकी जरुरत नहीं है।
शुरुआत भाजपा से करते हैं। बिहार बीजेपी ने नौ राजनेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इनमें प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, रामेश्वर चौरसिया, उषा विद्यार्थी, अनिल कुमार, रविंद्र यादव, श्वेता सिंह, इंदू कश्यप, अजय प्रताप, मृणाल शेखर शामिल हैं। भाजपा के इन चेहरों का बिहार की राजनीति में बड़ा नाम है। कई बार विधायक बन चुके हैं। पार्टी के लिए समर्पित रहे हैं। लेकिन चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिला और उनकी जगह दूसरे उम्मीदवार को मौका दिया गया। जाहिर है कि यह चेहरे भाजपा के लिए अब महत्वपूर्ण नहीं रहे। वहीं दूसरी तरफ पार्टी से निकाले जाने के बाद भी इन नेताओं का भाजपा के प्रति प्रेम कम नहीं हुआ, उनके लिए नरेन्द्र मोदी ही नेता हैं।
वहीं कांग्रेस का फैसला सबसे ज्यादा हैरान करनेवाला है। बिहार में कांग्रेस के भीष्म पितामह कहे जानेवाले सदानंद सिंह को सभी पदों और कमिटी से अलग कर दिया गया है, सीधे शब्दों में कहा जाए उन्हे पार्टी से अलग कर दिया गया है। सदानंद सिंह बिहार के लिए कांग्रेस का वह इकलौता चेहरा है, जो जनता के बीच थोड़ी पहचान रखते हैं और अपनी आधी जिंदगी पार्टी के लिए दी है। लेकिन चुनाव में टिकट वितरण में गड़बड़ी का हवाला देकर उन्हें चयन समिति से हटा दिया गया। उनके साथ दो मदन मोहन झा और डा. अखिलेश सिंह पर भी कार्रवाई की गई है। बिहार कांग्रेस के लिए यह सभी बड़े नाम हैं।
नाम नहीं पार्टी बड़ी
भाजपा और कांग्रेस देश के दो सबसे बड़ी पार्टी है। दोनों ने अपने पुराने नेताओं पर कार्रवाई कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनके लिए किसी नेता का नाम नहीं, बल्कि पार्टी बड़ी है। इसके खिलाफ जाकर काम करनेवाले नेताओं को पार्टी में कोई जगह नहीं है।
नीतीश को खुश करने के लिए यह सब
ऐसा भी माना जा रहा है कि भाजपा के नौ नेताओं पर कार्रवाई नीतीश कुमार को खुश करने के लिए किया गया है। बीजेपी ने यह पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि एनडीए के लिए नीतीश ही सीएम होंगे। ऐसे में पार्टी से बगावत करनेवालों को इसलिए बाहर का रास्ता दिखाया गया है, ताकि जदयू को किसी प्रकार की शिकायत करने का मौका नहीं मिले।

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