ईमानदारी के प्रतिमा: लाल बहादुर शास्त्री - BiharDailyNow
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ईमानदारी के प्रतिमा: लाल बहादुर शास्त्री

पांच फीट दो इंच के सामान्य से कद वाले लालबहादुर शास्त्री की आज 116वीं जयंती मनाई जा रही है। भारत के लोकप्रिय व देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 1904 में जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। लाल बहादुर शास्त्री ने ही हरित क्रांति व श्वेत क्रांति का आधार रखा था। अगर बात करें शास्त्री जी की लोकप्रियता की तो,
इनकी एक मात्र आवाज़ पर लाखों भारतीयों ने एक वक़्त का खाना छोड़ दिया था। दरअसल, जब शास्त्री प्रधानमंत्री बने तब देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती अनाज की थी। उस वक्त खाने की चीजों के लिए भारत अमेरिका पर निर्भर था। उसी बीच 1965 में पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया। तभी देश का हौसला बुलंद करने के लिए शास्त्री ने ‘जय जवान, जय किसान ‘ का नारा भी दिया था। अन्न की कमी से जूझ रहे देश को पटरी पर लाने के लिए उन्होंने एक समय भूखे रहने की अपील की थी जिसे पूरे देश ने स्वेच्छा से माना था।

महिलाओं के उत्थान में भी शास्त्री जी की अहम भूमिका

लाल बहादुर शास्त्री जी नेे महिलाओं के उत्थान में भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने महिलाओं को रोज़गार देने की दिशा में सबसे पहले काम किया और महिलाओं को ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जोड़ा। उस समय उन्होंने महिलाओं को बतौर कंडक्टर लाने की पहल की थी।

ईममानदारी के लिए भी प्रसिद्ध थे शास्त्री जी

एक बार लाल बहादुर शास्त्री जेल में थे तो उन्होंने अपनी मां को ख़त लिखा। खत में उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें लोक सेवक संस्था से पैसे समय पर मिल रहे हैं। मां ने जवाब दिया कि उन्हें पचास रुपये मिलते हैं जिसमें से लगभग 40 रुपये खर्च हो जाते हैं और बाकी के बचा लेती हैं। शास्त्री जी ने संस्था को पत्र लिखा और कहा कि अगली बार से उनके परिवार को 40 रुपये ही भेजे जाएं और बचे हुए पैसों से किसी जरूरतमंद की मदद कर दी जाए। वहीं एक बार जब उनके बेटे को गलत तरह से प्रमोशन दे दिया गया तो शास्त्री जी ने खुद उस प्रमोशन को रद्द करा दिया था।

आजादी की लड़ाई में 9 बार गए जेल

स्वतंत्रता संग्राम में लाल बहादुर शास्त्री कई बार जेल भी गए। 1930 में हुए ‘नमक सत्याग्रह’ के चलते उन्हें ढाई साल जेल में रहने पड़ा. इसके बाद फिर स्वतंत्रता आंदोलन की वजह से उन्हें 1 साल जेल की सजा हुई। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें 4 साल तक जेल में रहने पड़ा। बाद में 1946 में उन्हें जेल से रिहा किया गया था। कुल मिलाकर करीब 9 बार शास्त्री जेल गए थे।

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