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दागियों को धो डाला

हाल ही में राष्ट्रीय जनता दल ने एक आधिकारिक सूची जारी की जिसमें उनके दल ने बिहार चुनाव में उतरे प्रत्याशियों के आपराधिक मामलों का ब्यौरा दिया था। जिसमें 24 उम्मीदवारों का आपराधिक इतिहास दिया गया। वहीं आरजेड़ी ने सोशल साइट्स के जरिए भी इन उम्मीदवारों पूरा विवरण जनता के सामने रखा। राजद ने सूची जारी करते हुए ट्विटर पर लिखा- राष्ट्रीय जनता दल बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के उम्मीदवारों पर लंबित आपराधिक मामलों का सम्पूर्ण विवरण है।

राजद की सूची के मुताबिक प्रत्याशियों पर ये मामले हैं दर्ज:

राजद के इस सूची के मुताबिक, कई प्रत्याशियों पर क्रिमिनल केस, आर्म्स एक्ट, धोखाधड़ी, चुनाव के दौरान आचार संहिता का उल्लंघन, कोरोना महामारी एक्ट के तहत दर्ज मामलों का विवरण दिया गया है। इसके अलावा मारपीट, हथियार रखने, रंगदारी मांगने जैसे अपराधों के तहत जिन उम्मीदवारों पर मामले दर्ज किए गए हैं, उनके नामों की सूची भी जारी की गई है।

क्यों जारी की गयी सूची:

आपको बता दें राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश देते हुए अपना फैसला सुनाया था। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को आदेश दिया कि उसे अपने उम्मीदवारों के आधिकारिक मामलों का रिकॉर्ड अपने वेबसाइट पर दिखाना होगा। साथ ही यह भी आदेश जारी किया कि क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों को वो टिकट क्यों दे रहे हैं, इसकी वजह बतानी होगी और जानकारी वेबसाइट पर देनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सियासी दलों को वेबसाइट, न्यूजपेपर और सोशल मीडिया पर यह बताना होगा कि उन्होंने ऐसे उम्मीदवार क्यों चुनें जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सियासी दलों को ऐसे उम्मीदवार को चुनने के 72 घंटे के भीतर चुनाव आयोग को अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी जिसके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। जिन उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं उनके बारे में अगर राजनीतिक दल न्यायालय की व्यवस्था का पालन करने में असफल रहते हैं तो चुनाव आयोग इसे शीर्ष अदालत के संज्ञान में लाए।

जस्टिस आर एफ नरीमन और एस रविंद्र भट की बेंच ने सुनाया था फैसला:

जस्टिस आर एफ नरीमन और एस रविंद्र भट की बेंच ने 13 फरवरी 2020 को यह फैसला सुनाई थी। वहीं शीर्ष अदालत ने कहा है कि अगर इस आदेश का पालन नहीं किया गया तो राजनीतिक दलों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।

दागीयों का है बोल—बाला:

दागी नेताओं का हर तरफ बोल—बाला है, इस मामले में शायद ही देश का कोई ऐसा कोना होगा जो इससे बचा हो। अगगर बात करें संसद की तो इस बार संसद में 43 फीसदी सांसद दागी। आपको बता दें, 542 सांसदों में से 233 यानि 43 फीसदी सांसदों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे लंबित हैं। हलफनामों के हिसाब से 159 यानि 29 प्रतिशत सांसदों के खिलाफ हत्या, बलात्कार और अपहरण जैसे गंभीर मामले लंबित है। जिसमें, भाजपा के 303 में से 301 सांसदों के हलफनामे के विश्लेषण में पाया गया कि साध्वी प्रज्ञा सिंह सहित 116 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। वहीं कांग्रेस के 52 में से 29 सांसद आपराधिक मामलों में घिरे हैं। जिसमें कांग्रेसी सांसद डीन कुरियाकोस का नाम इस सूची में प्रथम स्थान पर दर्ज है। आपको बता दें, केरल से नवनिर्वाचित कांग्रेसी सांसद डीन कुरियाकोस पर 204 लंबित मामलें हैं।

बिहार, केरल और बंगाल के सबसे ज्यादा सांसदों पर मामले :

आपराधिक मामलों में फंसे सर्वाधिक सांसद केरल और बिहार से चुन कर आए। केरल से निर्वाचित 90 फीसदी, बिहार से 82 फीसदी, पश्चिम बंगाल से 55 फीसदी, उत्तर प्रदेश से 56 और महाराष्ट्र से 58 प्रतिशत सांसदों पर केस लंबित। वहीं सबसे कम नौ प्रतिशत सांसद छत्तीसगढ़ के और 15 प्रतिशत गुजरात के हैं।

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